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लूनकरणसर क्षेत्र में मनरेगा नाम परिवर्तन को लेकर विरोध तेज, कांग्रेस नेताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी

लूनकरणसर, बीकानेर (राजस्थान) – केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) का नाम बदलने और उसकी संरचना में बदलाव किए जाने के विरोध में अब लूनकरणसर क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में भी विरोध तेज होता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों, मजदूरों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है।

इस संबंध में कांग्रेस नेता राजेंद्र मूंड तथा गुसाईसर से युवा कांग्रेस नेता रामनिवास गोदारा ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के लिए रोजगार की गारंटी है। इसका नाम बदलना और मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करना ग्रामीण हितों के खिलाफ है।

ग्रामीण अधिकारों पर हमला बताया

कांग्रेस नेता राजेंद्र मूंड ने कहा कि मनरेगा को महात्मा गांधी के नाम से जोड़ना केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि यह योजना गरीबों के अधिकारों से जुड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा का नाम बदलकर इसकी आत्मा को खत्म करना चाहती है।
उन्होंने कहा, “मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों परिवारों को रोजगार दिया है। इसका नाम और स्वरूप बदलना गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है।”

गुसाईसर से युवा नेता रामनिवास गोदारा का बयान

गुसाईसर से युवा नेता रामनिवास गोदारा ने बताया कि लूनकरणसर तथा आसपास के गांवों में ग्रामीण मजदूरों और युवाओं में इस फैसले को लेकर भारी रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम मनरेगा की गारंटी व्यवस्था को कमजोर करने वाला है।

रामनिवास गोदारा ने कहा,
“मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवन रेखा रही है। अगर इसका नाम और ढांचा बदला गया, तो रोजगार की गारंटी खत्म हो जाएगी। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही यह फैसला वापस नहीं लिया, तो लूनकरणसर और गुसाईसर सहित आसपास के गांवों में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

आसपास के गांवों में भी विरोध जारी

सूत्रों के अनुसार लूनकरणसर क्षेत्र के कई गांवों में इस मुद्दे को लेकर बैठकों का दौर जारी है। ग्रामीणों, मजदूर संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आने वाले दिनों में धरना-प्रदर्शन, रैली और ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा के तहत उन्हें साल में 100 दिन का रोजगार मिलता था, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति संभलती थी। नाम परिवर्तन के साथ-साथ योजना के स्वरूप में बदलाव से ग्रामीणों को डर है कि कहीं रोजगार के अवसर कम न हो जाएं।

कांग्रेस का साफ संदेश

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि पार्टी मनरेगा को कमजोर नहीं होने देगी। राजेंद्र मूंड ने कहा कि यह आंदोलन केवल राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि गरीब और मजदूर वर्ग के हक की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गांव-गांव जाकर लोगों को एकजुट करेगी और जरूरत पड़ी तो जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आंदोलन को ले जाया जाएगा।

आंदोलन की चेतावनी

रामनिवास गोदारा ने बताया कि फिलहाल यह आंदोलन चेतावनी के रूप में चल रहा है, लेकिन यदि सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में लूनकरणसर, गुसाईसर और आसपास के गांवों में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

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